Beauty and The Beast - ब्यूटी और बीस्ट की कहानी

अपना काम खत्म कर के व्यापारी जब अपने घर की ओर चला, तो वह तूफ़ान में फंस गया और रास्ते से भटक गया। बहुत कोशिशों के बाद भी वह अपने घर का रास्ता ना ढूंढ सका, तब तक तो अँधेरा भी हो चुका था। तभी अचानक उसकी नज़र एक रौशनी पर पड़ी जो दूर एक महल से आ रही थी। व्यापारी ने सोचा शायद महल में उसे रात बिताने की जगह मिल जाये, इसलिए वह उस तरफ चल पड़ा।

Beauty and The Beast - ब्यूटी और बीस्ट की कहानी

एक समय की बात है, एक व्यापारी अपनी तीन बेटियों के साथ रहता था। व्यापारी को अपनी तीनो बेटियों से प्यार था। एक दिन उसे किसी काम से दूसरे देश जाना था, जाने से पहले व्यापारी ने अपनी तीनो बेटियों को अपने पास बुलाया और पूछा- "मेरी प्यारी बच्चियों, कहो मैं परदेस से तुम तीनों के लिए क्या लाऊं?".

पहली बेटी ने सुन्दर कपड़े और दूसरी बेटी ने गहने मंगवाए। तीसरी बेटी जिसका नाम ब्यूटी था, उसने अपने पिता से कहा- "आप मेरे लिए एक गुलाब का फूल ले आये।" व्यापारी ने अपनी तीनो बेटियों से उनके उपहार लाने का वादा किया और अपने सफर पर निकल पड़ा।

अपना काम खत्म कर के व्यापारी जब अपने घर की ओर चला, तो वह तूफ़ान में फंस गया और रास्ते से भटक गया। बहुत कोशिशों के बाद भी वह अपने घर का रास्ता ना ढूंढ सका, तब तक तो अँधेरा भी हो चुका था। तभी अचानक उसकी नज़र एक रौशनी पर पड़ी जो दूर एक महल से आ रही थी। व्यापारी ने सोचा शायद महल में उसे रात बिताने की जगह मिल जाये, इसलिए वह उस तरफ चल पड़ा।

जब व्यापारी महल में पंहुचा तो, महल में कोई भी नहीं था। उसने हर तरफ देखा लेकिन उसे महल में कोई नहीं मिला। आश्चर्य की बात थी कि खाने की मेज़ पर कई प्रकार के स्वादिष्ट व्यंजन रखे हुए थे, परन्तु उन्हें खाने वाला कोई नहीं दिख रहा था। भोजन को देख व्यापारी की भूख और बढ़ गयी थी, इसलिए उसने भर पेट खाना खाया और एक कमरे में मुलायम गद्दों पे सो गया।

सुबह व्यापारी ने जब महल के बागीचे में सुन्दर गुलाब खिले देखे, तो उसे ब्यूटी से किया हुआ वादा याद आ गया। उसने एक फूल तोड़ा और घर की ओर जाने लगा।

तभी वहाँ एक भयानक जीव प्रकट हुआ और बोला-  "मैंने तुम्हे अपना भोजन खाने दिया, अपने मुलायम गद्दों पर सोने दिया और तुम मेरे ही बागीचे से गुलाब तोड़ रहे हो। तुम्हे इसकी सज़ा भुगतनी होगी।"

व्यापारी बहुत डर गया था, कांपते हुए बोला- "मुझे माफ़ कर दो! माफ़ कर दो मुझे!! मुझे मत मारो। यह गुलाब मैंने अपने लिए नहीं तोड़ा, अपनी बेटी के लिए तोड़ा था। मैंने अपनी बेटी से वादा किया था कि मैं उसके लिए गुलाब का फूल लाऊंगा।"

यह सुनते ही राक्षस ने व्यापारी से कहा- तुम्हे मैं एक शर्त पर छोडूंगा, तुम्हे अपनी बेटी को महल में भेजना होगा।" यह सुनकर व्यापारी ने घबराते हुए अपनी बेटी को भेजने का वादा कर वहां से चला गया।

घर पहुँच कर व्यापारी ने अपनी बेटियों को सारी बात बताई और ब्यूटी से माफ़ी मांगते हुए कहा- "अपनी जान बचाने के लिए मुझे उस समय कुछ समझ नहीं आया और मैं राक्षस से यह वादा कर आया। मुझे माफ़ कर दो ब्यूटी! अपने स्वार्थी पिता को माफ़ कर दो!!"

ब्यूटी ने अपने पिता के गले लगते हुए तसल्ली दी और कहा- "आप बिलकुल परेशान ना हों पिताजी, मैं आपका किया हुआ वादा ज़रूर निभाऊंगी।"

ब्यूटी जब महल पहुंची तो बहुत घबराई हुई थी, राक्षस का भयानक चेहरा देख कर वह बहुत डर गयी। लेकिन राक्षस ने उसका खुले दिल से स्वागत किया। राक्षस ने उसे रहने के लिए अपने महल का सबसे अच्छा कमरा दिया और जब ब्यूटी आग के सामने बैठ कर कढ़ाई करती, तब राक्षस उसके पास घंटों तक बैठा रहता और उसे निहारता रहता। धीरे-धीरे दोनों को एक दुसरे का साथ अच्छा लगने लगा और वे अच्छे दोस्त बन गए।

अब वह दोनों सारा सारा दिन एक दूसरे से बातें करते और खुश रहते। राक्षस को ब्यूटी बहुत अच्छी लगती थी और वह उससे शादी करना चाहता था, लेकिन डरता था कि ब्यूटी एक राक्षस से कभी शादी नहीं करना चाहेगी। बड़ी हिम्मत जुटा कर एक दिन उसने ब्यूटी से अपने दिल की बात कहने का फैसला किया।

जब वह ब्यूटी के पास पहुंचा तो देखा कि ब्यूटी अपने पिता को याद करके बहुत उदास है। उससे ब्यूटी की उदासी देखी नहीं गयी और उसने ब्यूटी को एक जादुई शीशा दिया जिससे वह अपने पिता को देख सके। ब्यूटी बहुत खुश हुई, लेकिन जब उसने अपने पिता को देखा तो वह बहुत बीमार थे। यह देख ब्यूटी ने राक्षस से अपने पिता से मिलने की इच्छा जताई। राक्षस ने उसे पिता से मिलने की इजाज़त दे दी और सात दिन में वापिस आने को कहा। ब्यूटी ने तय समय में आने का वादा किया और अपने घर चली गयी।

ब्यूटी को सामने देख व्यापारी खुश हो गया और जैसे जैसे उसे पता चला कि राक्षस देखने में भले ही क्रूर हो, लेकिन वह दिल का बहुत ही नेक और दयालु है, व्यापारी की सेहत और सुधरती गयी। परिवार से मिलने की खुशी में सात दिन कब निकल गए, ब्यूटी को पता ही नहीं चला।

एक दिन ब्यूटी ने सपना देखा कि राक्षस की हालत बहुत खराब है और जल्दी ही मरने वाला है। अगले ही दिन वह महल वापस आ गयी और उसने पाया कि राक्षस बगीचे में बेसुध पड़ा हुआ था, जैसे वह मर चुका हो। ब्यूटी उसे देखते ही रो पड़ीऔर कहने लगी, "तुम मुझे छोड़ कर मत जाओ, मैं तुमसे बहुत प्यार करती हूँ और तुमसे शादी करना चाहती हूँ। मैं अपनी सारी ज़िन्दगी तुम्हारे साथ बिताना चाहती हुँ।"

जैसे ही ब्यूटी ने यह शब्द कहे, एक रौशनी ने राक्षस को ढक लिया, और जब रौशनी गायब हुई तो भयानक और क्रूर दिखने वाला राक्षस एक खूबसूरत राजकुमार में बदल चुका था। राजकुमार ने बताया कि एक दुष्ट जादूगरनी ने उसे एक राक्षस बना दिया था और सच्चे प्यार से ही उस जादू को तोड़ा जा सकता था।

बहुत समय से राजकुमार उस लड़की को ढूंढ रहा था, जो उससे उस रूप में प्यार करे जिससे सब डरते थे, जो उसकी सूरत से नहीं बल्कि उसके गुणों को चाहे। आखिरकार राजकुमार को उसका सच्चा प्यार मिल गया और वह बहुत खुश था। जल्द ही ब्यूटी और राजकुमार की शादी हो गयी और वह अपनी गुलाबों सी खूबसूरत दुनिया में हंसी खुशी रहने लगे।

Moral: इस कहानी से हमें यह शिक्षा मिलती है कि हमें किसी की सूरत को देखकर उसके व्यक्तित्व का अंदाजा नहीं लगाना चाहिए। इन्सान का बाहरी रूप सिर्फ दिखावा है, उसका साफ दिल, उसके गुण देखकर इन्सान से प्यार किया जाता है।