मर्द नहीं समझ सकते महिलाओं से जुड़ी ये 4 बातें

भले ही लड़कियां हर मामले में लड़कों के कंधे से कंधा मिलाकर चल रही हों, लेकिन उनकी जिंदगी अब पहले से ज्यादा चैलेंजिंग है।कुछ कठनाईया 21 वि सदी में भी महिलाओ का सफर और कठिन बना देती है।

मर्द नहीं समझ सकते महिलाओं से जुड़ी ये 4 बातें

छोटे कपड़े पहनकर सड़क पर चलना

भारतीय महिलाओं की समस्याएं केवल सामाजिक अधिकारों तक ही सीमित नहीं हैं बल्कि कार्यस्थलों और घरों में भी वह मानसिक और सामाजिक रूप से प्रभावित होती हैं। औरतों की सोच में भले ही पिछले कुछ सालों की तुलना में बदलाव आए हों लेकिन मर्दों की सोच और रवैये में कुछ खास फर्क नजर नहीं आता है।

ऐसा इसलिए क्योंकि सड़क पर छोटे कपड़े पहनकर चलने में लगभग हर महिला ही असुरक्षित महसूस करती है। चीरहरण करती आंखें, अंजाने में छूने वाले हाथ और सीटियों की गूंज का सामना किसी लड़के को नहीं बल्कि लड़की को ही हर रोज करना पड़ता है।

कैब में अकेले सफर करना

आज के समय में लेट नाइट घर आने-जाने के लिए तरह-तरह की कैब सर्विसेज मौजूद हैं। लेकिन औरतों के लिए यह सहूलियत भी किसी सिरदर्द से कम नहीं है। ऐसा इसलिए क्योंकि जिस तरह अंधेरा होने के बाद लड़कियों के लिए घर से निकलना सुरक्षित नहीं है उसी तरह उनका अकेले कैब में सफर करना भी किसी खतरे से खाली नहीं है।

हालांकि, घर तक सुरक्षित पहुंचने के लिए ज्यादातर लड़कियां अपने किसी करीबी से फोन पर बात करना या बीच-बीच में रास्ते की लोकेशन चेक करना पसंद करती हैं। लेकिन इसके बाद उनके मन में डर की भावना ज्यों की त्यों बनी रहती है।

नौकरी के लिए सवाल

किसी भी लड़के से ऐसा नहीं पूछा जाता है कि वह शादी के बाद नौकरी करेगा या नहीं लकड़ियों से सबसे पहला यही सवाल किया जाता है कि शादी के बाद नौकरी करोगी या नहीं, फैमिली प्लान के बारे में कुछ सोचा है भी या नहीं। इसमें कोई शक नहीं कि लड़कियों के लिए नौकरी करना मर्दों के मुकाबले बहुत ज्यादा ज़्यादा मुश्किल है।

उन्हें वर्कप्लेस से लेकर घर तक में ऐसी बातें सुनने को मिलती हैं, जिनका दर्द वह चाहकर भी किसी के साथ शेयर नहीं कर सकतीं। वहीं अगर गलती से अपने मन की इच्छा जाहिर भी कर भी दी, तो उन्हें नौकरी से हाथ धोना पड़ता है।

पहले परिवार फिर खुद के लिए सोचना

महिलाओं के लिए मुख्य समस्या निर्धारित नियम-आचरण और व्यवहार के बारे में है। ऐसा इसलिए क्योंकि एक महिला रात में एक पुरुष के बिना बाहर नहीं निकल सकती है। कुछ घरों में आज भी लड़कों की तुलना में लड़कियों के साथ अलग व्यवहार किया जाता है। वह कैसे बोलती है... कैसे कपड़े पहनती है...अपना जीवन जीने का तरीका किस तरह चुनती है... भले ही इन बातों से उसे कोई फर्क नहीं पड़ रहा हो लेकिन उसके आसपास रहने वाले लोग इससे असुरक्षित वातावरण महसूस करने लगते हैं।

ज्यादातर लोगों ऐसा मानना है कि एक महिला को मिलनसार होना चाहिए। उसे हमेशा ही समझौता करना चाहिए। भले ही वह बातें उसे नुकसान क्यों न पहुंचा रही हों।